GREYVIBE हैकर्स का हमला: ChatGPT और Google Gemini का इस्तेमाल कर बना रहे खतरनाक मैलवेयर 🛡️💻
सुरक्षा शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि हैकर्स ग्रुप GREYVIBE अब ChatGPT और Google Gemini जैसी एआई तकनीकों का उपयोग कर साइबर हमले तेज कर रहा है।

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एआई सिक्योरिटी ब्रीच: GREYVIBE हैकर्स का नया हथियार
साइबर सिक्योरिटी की दुनिया में आज एक गंभीर चिंता सामने आई है। प्रमुख सुरक्षा फर्म्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक, GREYVIBE नाम का एक शातिर हैकर ग्रुप अब ओपन-सोर्स और कमर्शियल AI मॉडल्स जैसे ChatGPT और Google Gemini का इस्तेमाल करके खतरनाक मैलवेयर कोड्स बना रहा है।
हैकर्स ने एआई चैटबॉट्स के सुरक्षा गार्डरेल्स (Guardrails) को बाईपास करके उनसे दुर्भावनापूर्ण कोडिंग लिखवाई है, जिसका उपयोग करके वे वैश्विक स्तर पर आईटी कंपनियों के सिस्टम में घुसपैठ कर रहे हैं।
कैसे एआई चैटबॉट्स का गलत फायदा उठा रहे हैं हैकर्स?
आमतौर पर ChatGPT और Gemini जैसी एआई प्रणालियों में ऐसे सुरक्षा नियम होते हैं जो उन्हें वायरस या हैकिंग से जुड़े कोड्स लिखने से रोकते हैं। लेकिन GREYVIBE ग्रुप ने नए 'जेलब्रेक' (Jailbreak) प्रॉम्प्ट्स खोज लिए हैं:
- पैराफ्रेस्ड रिक्वेस्ट्स: हैकर्स सीधे मैलवेयर कोड मांगने के बजाय, एआई को बताते हैं कि वे एक एजुकेशनल कोडिंग प्रोजेक्ट बना रहे हैं और उसकी सिक्योरिटी चेक करने के लिए कोड की आवश्यकता है।
- ऑब्फसकेटेड कोड जनरेशन: एआई से कोड के अलग-अलग छोटे हिस्से लिखवाए जाते हैं जिन्हें बाद में हैकर्स असेंबल करके एक खतरनाक रैनसमवेयर में बदल देते हैं।
- पलो ऑल्टो वल्नरेबिलिटी एक्सप्लॉइट: हाल ही में सामने आई PAN-OS की क्रिटिकल ऑथेंटिकेशन कमियों (CVE-2026-0257) का फायदा उठाकर हैकर्स एआई-जनरेटेड मैलवेयर को लाइव नेटवर्क्स में इंजेक्ट कर रहे हैं।
प्रमुख साइबर खतरों का विवरण:
- CVE-2026-0257 Flaw: यह पलो ऑल्टो नेटवर्क का एक सुरक्षा लूपहोल है जिसके जरिए बिना यूजरनेम और पासवर्ड के सिस्टम में घुसा जा सकता है।
- Double Extortion Model: हैकर्स विक्टिम के सिस्टम डेटा को एनक्रिप्ट करने से पहले ही चोरी कर लेते हैं और फिर पैसे न देने पर उसे लीक करने की धमकी देते हैं।
- Polymorphic Malware: यह एआई द्वारा लिखा गया एक ऐसा वायरस है जो अपनी कोडिंग को खुद-ब-खुद बदलता रहता है, जिससे इसे पकड़ना बहुत मुश्किल होता है।
India Angle 🇮🇳
भारतीय साइबर स्पेस और सरकारी संस्थानों के लिए यह हमला एक बड़ी चेतावनी है। भारत की नेशनल क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन सेंटर (NCIIPC) ने सभी बैंकों और सरकारी डेटा सर्वर्स को हाई अलर्ट पर रखा है, क्योंकि भारतीय बैंकिंग सेक्टर में पलो ऑल्टो के PAN-OS फायरवॉल सिस्टम्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है।
सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि भारत में साइबर अटैक का खतरा इसलिए भी अधिक है क्योंकि कई छोटे बैंक और वित्तीय संस्थान अपने सॉफ्टवेयर को समय पर पैच (अपडेट) नहीं करते। एआई-जनरेटेड मैलवेयर के कारण भारतीय डिजिटल पेमेंट गेटवे और यूपीआई ट्रांजैक्शंस को सुरक्षित रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
Conclusion — Aage Kya Hoga?
GREYVIBE ग्रुप द्वारा ChatGPT और Gemini का दुरुपयोग यह दिखाता है कि एआई सुरक्षा नीतियां अभी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। आने वाले समय में टेक कंपनियों को अपने एआई मॉडल्स के एथिक्स और गार्डरेल्स को और अधिक सख्त करना होगा। तब तक डेवलपर्स के लिए सलाह है कि वे अपने सिस्टम सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर्स को हमेशा लेटेस्ट पैच के साथ अपडेट रखें।
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Aryan Sharma
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