AITechNewsAITechNews
About UsContactDisclaimer
Flash News
GadgetsAI Toll Collection India: बिना रुके कटेगा टोल, NH-48 पर शुरू हुई नई AI-MLFF तकनीक! 📱⚡EV & MobilityDelhi EV Mandate 2027: दिल्ली में 2027 से केवल इलेक्ट्रिक 3-व्हीलर्स का होगा रजिस्ट्रेशन! 🚗⚡SoftwareDRDO Data Leak Statement: डीआरडीओ का बड़ा बयान, डार्क वेब पर मिल रहा डेटा पुराना! 💻🛡️GadgetsAI Toll Collection India: बिना रुके कटेगा टोल, NH-48 पर शुरू हुई नई AI-MLFF तकनीक! 📱⚡EV & MobilityDelhi EV Mandate 2027: दिल्ली में 2027 से केवल इलेक्ट्रिक 3-व्हीलर्स का होगा रजिस्ट्रेशन! 🚗⚡SoftwareDRDO Data Leak Statement: डीआरडीओ का बड़ा बयान, डार्क वेब पर मिल रहा डेटा पुराना! 💻🛡️GadgetsAI Toll Collection India: बिना रुके कटेगा टोल, NH-48 पर शुरू हुई नई AI-MLFF तकनीक! 📱⚡EV & MobilityDelhi EV Mandate 2027: दिल्ली में 2027 से केवल इलेक्ट्रिक 3-व्हीलर्स का होगा रजिस्ट्रेशन! 🚗⚡SoftwareDRDO Data Leak Statement: डीआरडीओ का बड़ा बयान, डार्क वेब पर मिल रहा डेटा पुराना! 💻🛡️
वापस Home पर
Software2026-07-294 min read

DRDO Data Leak Statement: डीआरडीओ का बड़ा बयान, डार्क वेब पर मिल रहा डेटा पुराना! 💻🛡️

DRDO ne Dark Web par 31GB data leak ke daawon ko kharij kiya hai. Official statement ke mutabiq servers surakshit hain aur data purana hai.

Verified by AITechNews Editorial Desk
DRDO Data Leak Statement: डीआरडीओ का बड़ा बयान, डार्क वेब पर मिल रहा डेटा पुराना! 💻🛡️

कल डार्क वेब पर भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) का 31GB रक्षा डेटा नीलाम होने की खबर फैलने के बाद, आज रक्षा मंत्रालय और डीआरडीओ ने स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है।

डीआरडीओ के उच्च अधिकारियों ने आज आधिकारिक तौर पर एक स्पष्टीकरण जारी करते हुए मीडिया रिपोर्ट्स में किए जा रहे सक्रिय साइबर हमले (Active Cyberattack) के दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। इस DRDO Data Leak Statement (डीआरडीओ डेटा लीक आधिकारिक बयान) में संगठन ने साफ किया है कि डीआरडीओ के मुख्य नेटवर्क, रक्षा सर्वर्स और डेटाबेस पूरी तरह से सुरक्षित (Air-Gapped) हैं और हाल ही में किसी भी प्रकार की सुरक्षा सेंध या हैकिंग नहीं हुई है।

💻 डीआरडीओ के आधिकारिक बयान के मुख्य बिंदु (Key Official Points)

डीआरडीओ के रक्षा प्रवक्ता और साइबर सुरक्षा विंग ने निम्नलिखित तथ्य जनता और मीडिया के सामने रखे हैं:

Advertisement
Google AdSense - Middle Ad 1 Slot ID: INLINE_MID_1
  • सक्रिय साइबर हमला नहीं हुआ: डीआरडीओ के आंतरिक कंप्यूटर सर्वर्स में किसी भी अज्ञात हैकर का अनधिकृत प्रवेश (Unauthorized Intrusion) नहीं पाया गया है।
  • डार्क वेब का डेटा पुराना और रीपैकेज्ड है: डार्क वेब पर 'CyberHunter_X' द्वारा $8,000 में बेचे जा रहे डेटा की फॉरेंसिक जांच करने पर पता चला कि यह डेटा वर्ष 2020 से 2022 के बीच एक बाहरी थर्ड-पार्टी वेंडर (External Contractor) के असुरक्षित सर्वर से चुराया गया पुराना और मनगढ़ंत (Fabricated) डेटा है, जिसे नया बताकर बेचा जा रहा था।
  • क्लासिफाइड मिलिट्री सीक्रेट्स सुरक्षित: अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि भारत के मिसाइल प्रोजेक्ट्स, फाइटर जेट्स या संवेदनशील रक्षा प्रणालियों से जुड़ा कोई भी क्लासिफाइड दस्तावेज लीक नहीं हुआ है।

🛡️ फॉरेंसिक ऑडिट और वेंडर सुरक्षा (Forensic Audit & Action Taken)

हालांकि वर्तमान नेटवर्क सुरक्षित है, फिर भी घटना की गंभीरता को देखते हुए रक्षा मंत्रालय ने कड़े कदम उठाए हैं:

  • थर्ड-पार्टी वेंडर्स का अनिवार्य ऑडिट: डीआरडीओ ने रक्षा निर्माण में शामिल सभी निजी कंपनियों और वेंडर्स के लिए सख्त नया साइबर सुरक्षा दिशानिर्देश जारी किया है। अब किसी भी वेंडर को रक्षा डेटा साझा करने से पहले मिलिट्री-ग्रेड एन्क्रिप्शन का पालन करना अनिवार्य होगा।
  • CERT-In और रक्षा साइबर एजेंसी का साझा ऑपरेशन: कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम और डिफेंस साइबर एजेंसी (DCBA) मिलकर डार्क वेब फोरम्स पर नजर रख रही हैं ताकि भारत विरोधी हैकर ग्रुप्स द्वारा फैलाए जा रहे दुष्प्रचार (Disinformation) पर लगाम लगाई जा सके।

🇮🇳 India Angle: साइबर स्पेस में झूठी खबरों (Misinformation) से निपटने की चुनौती

  • भारतीय नागरिकों और मीडिया को राहत: डीआरडीओ के इस त्वरित और पारदर्शी बयान से देश के नागरिकों और रक्षा क्षेत्र के निवेशकों के बीच फैली अनिश्चितता खत्म हुई है। यह घटना दर्शाती है कि आधिकारिक बयान समय पर आना कितना जरूरी है।
  • रक्षा आपूर्तिकर्ताओं के लिए कड़ा संदेश: यह मामला भारतीय रक्षा उद्योग (Defence Industry) के लिए एक चेतावनी है कि वे अपनी आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain Security) को केवल डीआरडीओ के भरोसे न छोड़ें। वेंडर्स को अपने खुद के फायरवॉल्स और डेटा एन्क्रिप्शन मजबूत करने होंगे।
  • साइबर वॉरफेयर और पैनिक कंट्रोल: दुश्मन देश अक्सर पुराने डेटा को रीपैकेज करके साइबर पैनिक (Cyber Panic) फैलाने की साजिश रचते हैं। डीआरडीओ का यह आधिकारिक खंडन ऐसे मनोवैज्ञानिक साइबर हमलों (Psychological Cyber Operations) को नाकाम करने में सफल रहा है।

Conclusion (निष्कर्ष)

DRDO Data Leak Statement ने यह साबित कर दिया है कि हमारे मुख्य रक्षा सर्वर्स सुरक्षित हैं। हालांकि, यह घटना हमें यह भी याद दिलाती है कि डिजिटल युग में थर्ड-पार्टी वेंडर्स की सुरक्षा उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी कि मुख्य रक्षा प्रयोगशालाओं की।

Aapko yeh article kaisa laga? 👇

About the Author

Aryan SharmaAuthor

Aryan Sharma

Tech Enthusiast & Founder, AITechNews India

Tech enthusiast | 5 saal se AI aur gadgets follow kar raha hoon. Main naye tech trends, AI tools, aur Indian gadget market ko closely track karta hoon — aur unhein simple Hinglish mein sabtak pohonchaata hoon. AITechNews mera ek chhota sa koshish hai ki har Indian reader ko latest tech news, bina jargon ke, clearly samjha sakoon.

Fact-Checked & Verified Sources

This article has been researched using editorial standards of AITechNews. Information is cross-verified through official press releases and globally syndicated news publishers.

RS
Rahul Sharma Verified Author
Senior Tech Editor · AITechNews

8+ सालों से tech journalism में हैं। Smartphones और AI में specialization है। IIT Delhi alumni.

Follow

Rate this: DRDO Data Leak Statement: डीआरडीओ का बड़ा बयान, डार्क वेब पर मिल रहा डेटा पुराना! 💻🛡️

0 logon ne rating di · Average: /5

0 रेटिंग्स