DRDO Data Leak: डार्क वेब पर 31GB रक्षा डेटा की नीलामी की खबर से हड़कंप! 💻🛡️
Cyber forensics firm Alibi Global ne dawa kiya hai ki DRDO ka 31GB sensitive defence data Dark Web par $8,000 mein auction ke liye rakha gaya hai.

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भारत के राष्ट्रीय रक्षा और सैन्य अनुसंधान क्षेत्र में आज एक बहुत बड़ी और सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील खबर सामने आई है।
केरल की प्रमुख साइबर फॉरेंसिक फर्म एलिबी ग्लोबल थ्रेट इंटेलिजेंस ग्रुप (Alibi Global Threat Intelligence Group) ने एक गंभीर रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) से कथित रूप से लीक हुआ 31GB (गीगाबाइट) संवेदनशील रक्षा डेटा डार्क वेब (Dark Web) के एक ब्लैक मार्केट फोरम पर नीलामी के लिए पोस्ट किया गया है। इस DRDO Data Leak (डीआरडीओ डेटा लीक) की खबर के बाद रक्षा मंत्रालय और भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है, और तुरंत उच्च स्तरीय सत्यापन (Verification Procedures) प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
💻 क्या-क्या डेटा नीलाम करने का दावा किया जा रहा है? (Alleged Leaked Data Details)
साइबर फॉरेंसिक फर्म की रिपोर्ट के मुताबिक, डार्क वेब पर 'CyberHunter_X' नामक थ्रेट एक्टर ने $8,000 (लगभग ₹6.7 लाख) की शुरुआती बोली में निम्नलिखित डेटा बेचने का दावा किया है:
- रक्षा प्रोजेक्ट्स के ब्लूप्रिंट्स: कथित तौर पर डीआरडीओ द्वारा विकसित किए जा रहे कुछ ड्रोन्स, मिसाइल सिस्टम्स और रडार कंपोनेंट्स के शुरुआती तकनीकी आरेख (Technical Blueprints)।
- वैज्ञानिकों और अधिकारियों की निजी जानकारी: डीआरडीओ में कार्यरत वैज्ञानिकों, प्रशासनिक अधिकारियों और ठेकेदारों की पर्सनल आइडेंटिफिएबल इंफॉर्मेशन (PII) जैसे ईमेल, फोन नंबर और सुरक्षा क्रेडेंशियल्स।
- विक्रेताओं और रक्षा अनुबंधों के रिकॉर्ड: भारतीय रक्षा निर्माण में शामिल निजी रक्षा आपूर्तिकर्ताओं (Private Defence Vendors) के बीच हुए गोपनीय पत्राचार और अनुबंधों की कॉपियां।
🛡️ डीआरडीओ का रुख और फॉरेंसिक जांच (Official Response & Forensic Probe)
डीआरडीओ और इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने इस खबर का संज्ञान लेते हुए मामले की फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी है। रक्षा अधिकारियों का प्राथमिक अनुमान है कि यदि यह डेटा प्रामाणिक है, तो यह सीधे डीआरडीओ के मुख्य एयर-गैप्ड (Air-gapped) सर्वर से नहीं, बल्कि किसी तीसरे पक्ष के वेंडर (Third-party Contractor) के असुरक्षित सर्वर के जरिए हैक किया गया हो सकता है।
🇮🇳 India Angle: राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) के लिए चेतावनी
- थर्ड-पार्टी वेंडर सुरक्षा पर कड़ा नियंत्रण जरूरी: भारत में अब रक्षा निर्माण में निजी क्षेत्र (जैसे टाटा एडवांस सिस्टम्स, एलएंडटी, भारत फोर्ज) की भागीदारी बहुत तेजी से बढ़ रही है। इस प्रकार की घटनाएं दर्शाती हैं कि केवल डीआरडीओ को ही नहीं, बल्कि रक्षा मंत्रालय के साथ काम करने वाली हर छोटी-बड़ी निजी कंपनी को मिलिट्री-ग्रेड साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल अपनाने होंगे।
- हनीट्रैप और फ़िशिंग हमलों की आशंका: यदि वैज्ञानिकों और कर्मचारियों के फोन नंबर और ईमेल सार्वजनिक होते हैं, तो विदेशी खुफिया एजेंसियां (जैसे चीनी या पाकिस्तानी हैकर ग्रुप्स) भारतीय वैज्ञानिकों को निशाना बनाकर फ़िशिंग और सोशल इंजीनियरिंग अटैक शुरू कर सकती हैं।
- एयर-गैप्ड नेटवर्क्स का कड़ा ऑडिट: यह घटना भारतीय रक्षा साइबर एजेंसी (DCBA) के लिए एक अलार्म कॉल है कि वे सभी सैन्य प्रयोगशालाओं के इंटरनेट से कटे (Air-gapped) सर्वर्स और पेन ड्राइव ट्रांसफर प्रोटोकॉल का कड़ा फॉरेंसिक ऑडिट करें।
Conclusion (निष्कर्ष)
DRDO Data Leak का यह कथित दावा चाहे पूरी तरह सच हो या फर्जी, यह भारत के रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर की साइबर सुरक्षा को मजबूत करने का एक बड़ा सबक है। डेटा ही आज के युग का नया हथियार है, और देश के रक्षा रहस्यों की डिजिटल सुरक्षा हमारी सीमाओं की सुरक्षा जितनी ही महत्वपूर्ण है।
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Aryan Sharma
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8+ सालों से tech journalism में हैं। Smartphones और AI में specialization है। IIT Delhi alumni.
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