Cboe Bitcoin Perpetual Contracts: अमेरिकी एक्सचेंज ला रहा है बिना एक्सपायरी वाले बिटकॉइन फ्यूचर्स, नया रेगुलेटरी धमाका! 🪙📈
Cboe Exchange ne continuous futures ko 'true' perpetual contracts me tabdeel karne ki charcha shuru kar di hai. जानिए क्या होंगे इसके नियम और भारतीय क्रिप्टो बाजार पर असर।

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क्रिप्टो ट्रेडिंग की दुनिया में एक बहुत बड़ा नियामक बदलाव (Regulatory shift) आने वाला है। दुनिया के प्रमुख डेरिवेटिव एक्सचेंज Cboe (शिकागो बोर्ड ऑप्शंस एक्सचेंज) ने घोषणा की है कि वह अपने मौजूदा 'कंटीन्यूअस फ्यूचर्स' (Continuous Futures) को पूर्ण रूप से 'Cboe Bitcoin Perpetual Contracts' (बिना एक्सपायरी वाले बिटकॉइन फ्यूचर्स) में बदलने की तैयारी कर रहा है।
अब तक अमेरिकी रेगुलेटेड एक्सचेंजों पर 'Perpetual' (पर्पेचुअल) ट्रेडिंग की अनुमति नहीं थी, लेकिन हाल ही में अमेरिकी कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन (CFTC) द्वारा अन्य एक्सचेंजों को मंजूरी दिए जाने के बाद Cboe ने भी इस दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
आइए जानते हैं कि पर्पेचुअल कॉन्ट्रैक्ट्स क्या होते हैं और यह क्रिप्टो मार्केट के लिए गेम-चेंजर क्यों हैं।
Continuous Futures vs True Perpetuals (अंतर क्या है?)
Cboe ने पिछले साल दिसंबर में 'कंटीन्यूअस फ्यूचर्स' (PBT और PET) लॉन्च किए थे। हालांकि वे पर्पेचुअल की तरह ही व्यवहार करते हैं, लेकिन उनमें तकनीकी अंतर होता है:
| विशेषता (Features) | कंटीन्यूअस फ्यूचर्स (Continuous Futures) | पर्पेचुअल कॉन्ट्रैक्ट्स (True Perpetuals) | |---|---|---| | एक्सपायरी (Expiration) | 10 साल की लंबी अवधि (10-Year limit) | कोई एक्सपायरी नहीं (Never expires) | | रोलओवर की जरूरत | नहीं, ऑटो-एडजस्ट होते हैं | नहीं, पोजीशन अनिश्चितकाल तक खुली रहती है | | फंडिंग रेट (Funding Rate) | दैनिक नकद समायोजन (Daily cash adjustment) | वास्तविक समय का फंडिंग रेट मैकेनिज्म (Real-time funding) | | रेगुलेशन | पूरी तरह अमेरिकी नियमों (CFTC) के तहत | क्रिप्टो-नेटिव एक्सचेंजों के समान सुव्यवस्थित नियम |
Cboe का मास्टर प्लान
अगर Cboe को इसके लिए अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो वे अपने दोनों प्रमुख कॉन्ट्रैक्ट्स को कन्वर्ट करेंगे:
- PBT (Bitcoin Continuous Futures): इसे सीधे बिना एक्सपायरी वाले बीटीसी पर्पेचुअल कॉन्ट्रैक्ट में बदल दिया जाएगा।
- PET (Ether Continuous Futures): यह ईथर पर्पेचुअल कॉन्ट्रैक्ट में तब्दील हो जाएगा।
इससे ट्रेडिशनल इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (जैसे हेज फंड्स और एसेट मैनेजर्स) को बिना किसी एक्सपायरी डेट के लंबे समय के लिए बड़ी शॉर्ट या लॉन्ग पोजीशन बनाने की सुविधा मिलेगी।
India Angle: भारतीय क्रिप्टो निवेशकों पर प्रभाव
- क्रिप्टो टैक्स से राहत (Arbitrage Opportunities): भारत में क्रिप्टो ट्रेडिंग पर 30% का फ्लैट टैक्स और 1% TDS लागू है। भारतीय निवेशक जो इंटरनेशनल डिसेंट्रलाइज्ड एक्सचेंजों पर पर्पेचुअल ट्रेड करते हैं, उन्हें हमेशा सुरक्षा का खतरा रहता है। रेगुलेटेड एक्सचेंज Cboe के इस कदम से भारतीय संस्थानों को विदेशी हेजिंग के लिए एक लीगल और सुरक्षित रास्ता मिल जाएगा।
- मार्केट में स्थिरता: जब बड़े अमेरिकी संस्थानों को बीटीसी और ईटीएच पर्पेचुअल का डायरेक्ट एक्सेस मिलेगा, तो मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ेगी। इससे बिटकॉइन की कीमतों में आने वाले उतार-चढ़ाव (Volatility) में कमी आ सकती है, जिसका सीधा फायदा भारतीय खुदरा निवेशकों को होगा।
- FEMA नियमों के तहत विदेशी निवेश: जो भारतीय संस्थागत निवेशक विदेशों में डेरिवेटिव्स में निवेश करना चाहते हैं, वे लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) या सेबी के म्यूचुअल फंड रूट्स के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से इन सुरक्षित अमेरिकी इंस्ट्रूमेंट्स में हिस्सेदारी ले सकेंगे।
Conclusion (निष्कर्ष)
Cboe का यह ऐतिहासिक कदम क्रिप्टो-नेटिव एक्सचेंजों (जैसे Binance या Bybit) को सीधे टक्कर देगा। अगर अमेरिका का सबसे पुराना डेरिवेटिव्स एक्सचेंज Cboe Bitcoin Perpetual Contracts को रेगुलेटेड रूप में बाजार में लाता है, तो यह पारंपरिक वॉल स्ट्रीट फाइनेंस और मॉडर्न डिजिटल एसेट्स के बीच की दूरी को हमेशा के लिए खत्म कर देगा।
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Aryan Sharma
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