GitHub Copilot token pricing में बड़ा बदलाव, अब डेवलपर टोकन्स से करेंगे भुगतान 💻⚡
GitHub ने Copilot के सब्सक्रिप्शन मॉडल को बदल दिया है। अब मंथली अनलिमिटेड यूज की जगह 'Token-based' बिलिंग सिस्टम लागू होगा। जानिए डेवलपर्स और कंपनियों के बजट पर इसका क्या असर होगा।

Is Article Mein
GitHub Copilot का नया प्राइसिंग मॉडल: टोकन्स के आधार पर होगी कोडिंग
कोडिंग को आसान बनाने वाले दुनिया के सबसे लोकप्रिय एआई असिस्टेंट GitHub Copilot ने अपने बिजनेस मॉडल में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव किया है। आज से GitHub ने अपनी पुरानी फ्लैट मंथली सब्सक्रिप्शन फीस ($10 प्रति माह) को खत्म कर दिया है और उसकी जगह GitHub Copilot token pricing सिस्टम लागू करने की घोषणा की है।
इस नए मॉडल के तहत डेवलपर्स को अनलिमिटेड यूसेज की जगह एआई द्वारा जनरेट किए गए कोड और चैट प्रॉम्प्ट्स (टोकन्स) के हिसाब से पैसे देने होंगे। कंपनी का दावा है कि इससे कोडिंग रिसोर्सेज का दुरुपयोग कम होगा और कम काम करने वाले डेवलपर्स को कम भुगतान करना पड़ेगा।
क्या है टोकन-बेस्ड बिलिंग और यह कैसे काम करेगी?
नए प्राइसिंग मॉडल में बिलिंग को दो हिस्सों में बांटा गया है: एक नॉमिनल बेस फीस और दूसरा यूसेज-बेस्ड टोकन चार्ज।
- बेस सब्सक्रिप्शन: प्रत्येक डेवलपर को $2 प्रति माह की न्यूनतम बेस फीस देनी होगी।
- टोकन चार्ज: कोपायलट द्वारा जनरेट किए गए प्रति 1,000 आउटपुट टोकन्स के लिए $0.05 का शुल्क लिया जाएगा।
- फ्री टियर: हर महीने पहले 50,000 टोकन्स सभी रजिस्टर्ड डेवलपर्स के लिए मुफ्त रहेंगे।
पुराने बनाम नए प्राइसिंग मॉडल की तुलना:
| पैरामीटर / मैट्रिक | पुराना मॉडल (फ्लैट) | नया मॉडल (टोकन-बेस्ड) | | --- | --- | --- | | मंथली बेस कॉस्ट | $10 (Individual) | $2 | | यूसेज लिमिट | अनलिमिटेड (Fair Use Policy लागू) | पे-एस-यू-गो (Pay-as-you-go) | | एवरेज कॉस्ट (लाइट कोडर) | $10 प्रति माह | लगभग $2 - $4 प्रति माह | | एवरेज कॉस्ट (हैवी कोडर) | $10 प्रति माह | लगभग $12 - $18 प्रति माह |
India Angle 🇮🇳
भारत दुनिया का सबसे बड़ा डेवलपर इकोसिस्टम है जहां 10 मिलियन से अधिक सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स और छात्र रहते हैं। इस GitHub Copilot token pricing बदलाव का भारतीय आईटी सेक्टर्स और फ्रीलांसरों पर मिश्रित असर पड़ेगा:
- फ्रीलांसरों को फायदा: वे डेवलपर्स जो महीने में केवल कुछ ही प्रोजेक्ट्स पर काम करते हैं, उनका मासिक बिल $10 से घटकर आधा हो जाएगा।
- आईटी कंपनियों पर बोझ: इंफोसिस, टीसीएस और विप्रो जैसी दिग्गज कंपनियों के लिए कोडिंग टूल्स का खर्च बढ़ जाएगा, क्योंकि उनके डेवलपर्स दिन-रात कोडिंग करते हैं। कंपनियों को अब बजट ऑप्टिमाइज करने के लिए डेवलपर्स की टोकन लिमिट सेट करनी होगी।
Conclusion — Aage Kya Hoga?
टोकन-बेस्ड बिलिंग सिस्टम लागू होने से डेवलपर्स को अब एआई कोड जनरेट करने से पहले सोचना होगा। इससे फालतू कोड जनरेशन में कमी आएगी लेकिन साथ ही डेवलपर्स के बजट पर लगातार ध्यान रखना पड़ेगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या माइक्रोसॉफ्ट और ओपनएआई भी अपने अन्य एआई टूल्स के लिए यही पे-एस-यू-गो मॉडल अपनाएंगे।
Related: [ai-codex-top-10-uses-at-work-2026-04-24]
Aapko yeh article kaisa laga? 👇
About the Author
Aryan Sharma
Tech Enthusiast & Founder, AITechNews India
Tech enthusiast | 5 saal se AI aur gadgets follow kar raha hoon. Main naye tech trends, AI tools, aur Indian gadget market ko closely track karta hoon — aur unhein simple Hinglish mein sabtak pohonchaata hoon. AITechNews mera ek chhota sa koshish hai ki har Indian reader ko latest tech news, bina jargon ke, clearly samjha sakoon.
Fact-Checked & Verified Sources
This article has been researched using editorial standards of AITechNews. Information is cross-verified through official press releases and globally syndicated news publishers.
AI tools और SaaS products को deep-dive करते हैं। Ex-Infosys software engineer। Passionate about making tech accessible.
Rate this: GitHub Copilot token pricing में बड़ा बदलाव, अब डेवलपर टोकन्स से करेंगे भुगतान 💻⚡
0 logon ne rating di · Average: —/5
You May Also Like 🔥
View All
ChatGPT Market Share Falls: पहली बार 50% से नीचे गिरा, Gemini और Claude ने बढ़ाई मुश्किल! 📉🤖

Noam Shazeer Joins OpenAI: गूगल और Character.AI के बाद अब ओपनएआई में बड़ी पारी! 🚀🧠

