Abbott Laboratories Cyber Extortion: हैकर्स ने दी 2.2 करोड़ मेडिकल रिकॉर्ड्स लीक करने की धमकी, अलर्ट जारी! 💻🛡️
Hacker group ShinyHunters ne Abbott Laboratories ko 21 July ki deadline di hai. 2.2 crore doctor-patient records leak hone ka khatra.

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स्वास्थ्य सेवा (Healthcare) और मेडिकल उपकरण निर्माण क्षेत्र की वैश्विक दिग्गज कंपनी एबॉट लेबोरेटरीज (Abbott Laboratories) पर एक बहुत बड़ा साइबर एक्सटॉर्शन हमला हुआ है।
कुख्यात हैकर ग्रुप 'शाइनीहंटर्स' (ShinyHunters) ने एबॉट के कैंसर डायग्नोस्टिक्स सिस्टम्स में सेंध लगाने का दावा किया है। हैकर्स ने एबॉट लेबोरेटरीज को आज, 21 जुलाई 2026 तक की अंतिम समय सीमा (Extortion Deadline) दी है, और चेतावनी दी है कि यदि कंपनी ने उनकी फिरौती की मांग नहीं मानी, तो वे 2.2 करोड़ (22 Million) डॉक्टर-मरीज मेडिकल नोट्स और 2 करोड़ से अधिक मेडिकल ऑर्डर्स को डार्क वेब पर सार्वजनिक कर देंगे।
💻 कैसे हुआ यह साइबर हमला और क्या डेटा हुआ चोरी?
साइबर सुरक्षा जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, हमलावरों ने सोशल इंजीनियरिंग का सहारा लिया:
- विशिंग (Voice Phishing) हमला: हैकर्स ने एबॉट के कर्मचारियों को फोन पर झांसा देकर (Vishing) माइक्रोसॉफ्ट एंट्रा सिंगल साइन-ऑन (SSO) क्रेडेंशियल्स चुराए, जिससे उन्हें कंपनी के पुराने सर्वर का एक्सेस मिल गया।
- संवेदनशील मेडिकल डेटा चोरी का दावा: हैकर्स का दावा है कि उनके पास 2.2 करोड़ डॉक्टर-पेशेंट नोट्स, 2 करोड़ मेडिकल टेस्ट ऑर्डर्स, और 10 लाख से अधिक अमेरिकी सोशल सिक्योरिटी नंबर्स (SSN) और निजी पहचान डेटा मौजूद है।
- एबॉट की आधिकारिक प्रतिक्रिया: एबॉट ने स्पष्ट किया है कि उसके मुख्य विनिर्माण संयंत्र, मेडिकल डिवाइसेस (जैसे ग्लूकोज मॉनिटर और पेसमेकर) और प्रयोगशाला परिचालन पूरी तरह से सुरक्षित हैं और इन पर हमले का कोई असर नहीं पड़ा है।
🇮🇳 India Angle: भारतीय अस्पतालों और फार्मा कंपनियों के लिए गंभीर चेतावनी
- भारत में एबॉट की बड़ी मौजूदगी: एबॉट इंडिया (Abbott India) देश की सबसे बड़ी फार्मास्यूटिकल और न्यूट्रिशन कंपनियों में से एक है। लाखों भारतीय मरीज एबॉट के डायग्नोस्टिक टेस्ट्स और जीवनरक्षक दवाओं पर निर्भर हैं। इस घटना के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में रेड अलर्ट जारी किया है।
- हेल्थकेयर डेटा सुरक्षा (Healthcare Data Security): भारत में एम्स (AIIMS) और अन्य बड़े अस्पतालों पर पहले भी रैनसमवेयर हमले हो चुके हैं। अस्पतालों में मरीजों का मेडिकल रिकॉर्ड सबसे संवेदनशील होता है। इस साइबर घटना से भारतीय स्वास्थ्य संस्थानों को अपने कर्मचारियों के लिए वॉयस फिशिंग (Vishing) ट्रेनिंग और मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) को कड़ा करना होगा।
- डेटा गोपनीयता कानून (DPDP Act): यदि किसी भारतीय मरीज का डेटा विदेशी सर्वर्स के माध्यम से लीक होता है, तो भारत के डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड को ऐसे बहुराष्ट्रीय दिग्गजों पर भारी जुर्माना लगाने का अधिकार होगा।
Conclusion (निष्कर्ष)
Abbott Laboratories Cyber Extortion की यह घटना यह दर्शाती है कि साइबर अपराधी अब केवल वित्तीय संस्थानों को नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवा जैसे सबसे संवेदनशील क्षेत्रों को निशाना बना रहे हैं। 21 जुलाई की समय सीमा के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सुरक्षा एजेंसियां इस विशाल डेटा लीक को रोकने में सफल हो पाती हैं।
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Aryan Sharma
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8+ सालों से tech journalism में हैं। Smartphones और AI में specialization है। IIT Delhi alumni.
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