सीबीएसई और एंट्रेंस परीक्षा परिणामों के दौरान वेबसाइट्स क्यों नहीं होतीं क्रैश? जानिए इसके पीछे का क्लाउड विज्ञान।
लाखों की ट्रैफिक सर्ज होने पर ऑटो-स्केलिंग तुरंत वर्चुअल सर्वर बढ़ा देती है और लोड बैलेंसर रिक्वेस्ट को बराबर बांट देता है।
NIC और डिजीलॉकर अब हाइब्रिड क्लाउड आर्किटेक्चर पर चलते हैं, जिससे छात्रों को सेकंडों में बिना रुकावट रिजल्ट मिल जाता है।
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